दोस्त ने अपनी बहन की रसीली चूत मुझे गिफ्ट दिया

रात के करीब 2:00 बजे होंगे। अचानक ही मेरी नींद खुल गई। ड्राइवर ने बस को जोरदार ब्रेक मारा। बस का टायर पंक्चर हो गया | वह बड़ी मुश्किल से स्टेयरिंग पर काबू कर सका |

बारिश का मौसम होने के कारण बस में भी बहुत कम मुसाफिर थे। हम सभी लोग बस से नीचे उतर गए। सभी को जो भी वाहन मिला उनसे लिफ्ट लेकर इंदौर के लिए रवाना हुए। मैं अकेली डरी-सहमी हुई थी। सोचा था बस में ही रात गुजार दूँ लेकिन दो पुरुष ड्राइवर और कंडक्टर का भरोसा एक लड़की कैसे कर सकती है। एक लड़की के लिए भूत से ज्यादा डर उन लोगों से रहता था जो औरतों को अपनी हवस का शिकार बना सकते हैं। जब बस के सभी यात्री वहाँ से रवाना हो गए तब मेरा यह डर बहुत ही बढ़ गया था।




मैंने चलना शुरू किया। रास्ते में सोचती जा रही थी मालूम होता तो ओंकारेश्वर में रहनेवाले मेरे मामा के घर से जल्दी निकल पड़ती। इस मुसीबत का सामना नहीं करना पड़ता शायद भगवान मेरी परीक्षा लेना चहाते थे। आकाश में बिजली गरज रही। आसपास कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। चारों ओर बस जंगल ही था।

कभी-कभी जंगली जानवरों की आवाज कानों से टकराकर चली जाती है। चाँद भी आज मुझसे रूठा गया था। मालूम नहीं कहाँ छुप गया है । करीब एक घंटा चली कि अचानक फिर एक कार मेरे पास आकर रुक गई था । उसे एक साँवला युवक चला रहा था। मैडम इतनी रात आप कहाँ जा रही हो | और ये बारिश चलो मैं आपको लिफ्ट देता हूँ।'

मेरे सामने एक विकट समस्या खड़ी हो गई है | अगर उसको मना कर देती तो शायद कोई दूसरा मददगार न मिलता और अगर हाँ कह देती तो एक अनजाने शख्स पर भरोसा करूँ तो भी कैसे | एक तरफ कुआँ तो दूसरी तरफ खाई।



नानी कहा करती थी कि बेटी जब भी तुम कोई मुश्किल में फँस जाती हो और उससे बाहर निकलने के लिए दो विकल्प हो..तब उसी विकल्प को पसंद करो जो तुम्हारा दिल चाहता है। मैंने वही किया और आखिर में उसकी कार की अगली सीट पर बैठ गई। उसका नाम अजय था जो इस अंधकारभरी रात में मेरे लिए दीपक बनकर रास्ता दिखाने आ गया था।
दोस्त ने अपनी बहन की रसीली चूत मुझे गिफ्ट दिया दोस्त ने अपनी बहन की रसीली चूत मुझे गिफ्ट दिया Reviewed by Robert on March 19, 2020 Rating: 5

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