भाई सोहन की बीवी के साथ सुहागरात 2019

हाय दोस्तो, मेरा नाम संजय है और मैं नेपाल का रहने वाला हूँ. इस कहानी की शुरूआत मेरे चाचा के लड़के सोहन की शादी से शुरू होती है.

मैं सोहन की शादी में नहीं जा पाया था. इसलिए रिसेप्शन पार्टी में गया. उधर सब लोग स्टेज पर आ जा रहे थे. मैं भी स्टेज पर शादी की बधाई देने जाने लगा.

मैं जैसे ही स्टेज पर पहुंचा, तो मुझे शॉक लगा. मैंने देखा कि दुल्हन बनी लड़की 20-22 साल की एक गजब की शोला है. उसका रंग दूध सा गोरा, मानो संगमरमर हो, आंखें हिरणी जैसी, लम्बे बाल कमर तक, होंठों पर गुलाबी लिपस्टिक, पतली कमर, उस पर लाल लहंगा चुनरी, ब्लाउज़ डीप कट वाला, उस पर सर से पांव तक सोने के गहनों से लदी मेरे सामने मानो एक अप्सरा खड़ी थी.

उस समय उसका फिगर 28-38-48 का रहा होगा. उसका नाम सीमा था. जैसा उसका नाम वैसी ही उसकी सूरत थी. मुझे तो यही लगा कि मानो कोई अप्सरा जैसी मेरे सामने खड़ी हो.

इतने में मुझे भाई सोहन ने आवाज लगाई और मैं उन दोनों से मिलकर उन्हें शादी की बधाई दी.

तब सीमा ने पहली बार नमस्ते कहते हुए मुझसे बात की. मैंने तो उसी समय सीमा को अपने दिल में बसा लिया था. मैंने सोचा कि काश सीमा कि शादी मुझसे हुई होती. मैं अपनी किस्मत को कोसता हुआ स्टेज से नीचे उतर आया.

लेकिन सारी पार्टी में मेरा ध्यान सीमा पर ही था. उसकी अदा पर, उसके बात करने के तरीके पर. उस समय 4-5 बार सीमा की नज़रें मुझसे मिलीं, पर मैंने नज़रें चुरा लीं. मुझे ऐसा भी लगा कि सीमा ने मुझे उसे देखते हुए देख लिया है.



खैर पार्टी खत्म हुई, तो सीमा स्टेज से नीचे उतरी. मैं भी उनके पीछे चल रहा था और सीमा को चलते हुए देखकर जैसे आहें भर रहा था. मैं उसकी सुन्दरता के बारे में सोच रहा था, लेकिन क्या फायदा. आखिर सीमा की शादी चाचा के लड़के सोहन से हुई थी.

उस रात घर जाकर मैं ठीक से सो भी नहीं पाया. सारी रात सीमा के बारे में सोचता रहा.

खैर धीरे धीरे समय बीतता गया. सीमा का जेठ होने के कारण उससे कभी डायरेक्ट बात तो नहीं होती थी, पर कभी फ़ोन उठा लेती, तो ‘नमस्ते भाईसाहब, देती हूँ इनको फोन..’ यही आवाज सुनने को मिल जाती.

मुझे उसकी आवाज सुनकर काफी अच्छा लगता था. वो कभी मेरे सामने भी आती, तो घूंघट में होती, जिसके कारण मेरा आकर्षण उसके प्रति बढ़ता जा रहा था. बस लगता कि घूंघट में कोई चांद है. हमेशा साड़ी में रहने वाली सीमा की कमर देख कर मेरे दिल को मानो सुकून मिल जाता था. उसकी गोरी कमर मेरा दिल चीर देती थी.

जब वो बार बार सामने से आती जाती, तो उसकी पायल की आवाज मेरा ध्यान खींच लेती थी.

ऐसे ही समय बीतता गया, उनकी शादी को 7 महिने हो गए.

तभी गांव में किसी रिश्तेदार की शादी में सभी को नेपाल से 10 दिनों के लिए जाना पड़ा. घर में सिर्फ मैं अपने घर में और सोहन,सीमा उनके घर में रह गए.

हम बस तीन लोगों को छोड़कर सभी लोग चले गए. उसके एक दिन बाद सोहन को भी बिज़नेस के काम के लिए अचानक 5 दिनों के लिए दिल्ली जाना पड़ा.

सोहन ने मुझे फोन किया और पूरी बात बता दी. उसने बताया कि 5 दिनों तक सुबह शाम घर पर एक चक्कर लगा लिया कीजिएगा.

यह सुनकर मेरे मन में खुशी का ठिकाना नहीं रहा, लेकिन फिर भी मैंने ये बोलते हुए मना कर दिया कि सीमा मेरी बहू है और मैं कैसे आकर बात करूंगा.
लेकिन सोहन के बार बार बोलने पर मैं मान गया और उसे चिंता मुक्त होकर जाने को कहा.

शाम को 7:40 बजे कार लेकर सोहन को ट्रेन पर छोड़ने भी गया. लेकिन ये क्या सीमा भी तैयार थी स्टेशन जाने के लिए. मुझे लगा कि दोनों दिल्ली जा रहे हैं. लेकिन रास्ते में सोहन ने बताया कि उसे स्टेशन छोड़कर सीमा को मार्किट में थोड़ा काम है.
मुझे राहत मिली.

हम स्टेशन गए, अभी ट्रेन आने को 26 मिनट बाकी थे, तो सोहन और सीमा को अकेले बातचीत करने को छोड़ दिया और उनसे दूर आकर खड़ा हो गया.

सीमा को देखते हुए मैं दूर से ही सुख लेने लगा. उस वक्त मैंने सीमा को ध्यान से देखा, वो परी लग रही थी.

सीमा ने उस दिन हरे रंग की साड़ी पहनी हुई थी और साथ ही बैकलेस ब्लाउज, जो कि उसकी सुंदरता पर चार चांद लगा रहा था. मैंने उसे इस रूप में पहले कभी नहीं देखा था. उसके बाल खुले हुए थे जो उसके चेहरे पर बार-बार आ रहे थे. उसके होंठों की लाली और आंखों का काजल मुझे मंत्र मुग्ध कर रहा था.

उसके शरीर में शादी से लेकर अब तक काफी बदलाव आ गया था. हां अब उसका फिगर में काफी बदलाव आया था अब उसका फिगर 36-28-36 का होकर पहले से बदल गया था.

मैं यह सब सोच रहा था कि ट्रेन आने की घोषणा हो गई. ट्रेन आते ही सोहन उस पर चढ़ गया और कुछ समय बाद ट्रेन निकल गई.

इसके बाद मैं और सीमा कार की ओर आए. इस तरह उस समय हम दोनों में किसी प्रकार का कोई भी बातचीत नहीं हुई. सीमा ने अभी अपना चेहरा ढक रखा था.

मैं सीमा को लेकर कार के पास पहुंच गया. मैंने पीछे का दरवाजा खोला, लेकिन सीमा आगे का दरवाजा खोलकर बैठ गई. मैं भी गाड़ी खोल कर बैठ गया. तभी सीमा ने एसी चालू करने के लिए कहा.
उसने कहा- मैं क्या आगे नहीं बैठ सकती?
मैंने कहा- क्यों? आगे ही बैठी हो?
उसने कहा- नहीं, आपने पीछे का दरवाजा खोला था न, इसलिए पूछा.

यह सुनकर मुझे काफी अच्छा लगा, मैंने भी सीमा से फ्री होकर बैठने को कहा और घूंघट ना लेने के लिए कहा. मैं इस प्रथा का विरोध करता हूं, मैंने उससे इस बात की भी चर्चा की. इस पर सीमा ने अपना घूंघट उठाते हुए मुझे धन्यवाद कहा.

घूंघट हटते ही चांद मेरी आंखों के सामने था और मैं एकटक उसके चांद से चेहरे को देखता रह गया.

इस पर कुछ पल बाद सीमा ने मेरा ध्यान हटाया और कहा- चलेंगे नहीं … आप कहां खो गए?
मैंने कहा- बस तुम्हें देख रहा था.
सीमा शर्मा गई.

मैंने कहा- कहां चलना है.
सीमा ने कहा- लेडीजवियर की दुकान पर जाना है.
यह मौका सही है, यह सोच कर मैंने अपने दोस्त की दुकान की ओर गाड़ी मोड़ ली.

हम लोग जैसे ही दुकान के पास पहुंचे, तो मैंने उससे कहा- लो … आपके मतलब की दुकान आ गई.

इस बीच सीमा और मैं थोड़ा बहुत बात भी कर रहे थे. हम दुकान में जैसे ही गए, मेरा दोस्त मुझे देखकर मेरे पास आया.

उसने कहा- बहुत सालों बाद मिले हो, वो भी भाभी के साथ … शादी कब कर ली, बुलाया भी नहीं.
इस पर मैं कुछ बोलता, तब तक सीमा ने ही बोल दिया- नहीं भाईसाब, शादी गांव में हुई थी.

मुझे उसकी बात सुनकर शॉक सा लगा और सोचने लगा कि काश ये सच होता.

ऐसे ही बात करते करते हम दुकान में बैठ गए. दोस्त ने सीमा से पूछा- क्या दिखाऊं भाभी?
इस पर सीमा ने जवाब दिया- ब्रा पेंटी.

दोस्त ने ब्रा का सैट लाते हुए सीमा को दिखाना चालू किया. सीमा ने दो ब्रा और लोअर पसंद किए. उसने मुझसे पूछा अच्छे है ना?
मैंने भी हंसकर जवाब दिया- आप पर सब अच्छे लगते हैं.

ब्रा सैट पिंक और रेड कलर के थे. सामान लेकर हम दोनों दुकान से निकल आए और कार में आकर बैठ गए.

कार में बैठते ही सीमा ने कहा कि आप अकेले में मुझे सीमा नाम से ही बुलाइएगा.
मैंने कहा- आपको बुरा तो नहीं लगा?
सीमा ने पूछा- किस बात का?
इस पर मैंने भी मौका देखते हुए कहा कि मेरे मित्र ने आपको मेरी पत्नी समझ कर बात की, इससे आपको बुरा तो नहीं लगा?

इस पर सीमा की एक कातिलाना मुस्कान ने मुझे हरी झण्डी दे दी. कुछ ही समय में मैं और सीमा काफी खुल गए थे.

अब मैंने पूछा- और कहां चलना है?
इस पर उसने कहा- किसी पार्क में चलते हैं.

हम दोनों एक पार्क की तरफ चल पड़े. जैसे ही हम लोग पार्क में पहुंचे, वहां एक और मित्र मिल गया. वो भी अपनी पत्नी के साथ था. मित्र के साथ काफी समय घूमने के बाद मित्र जिद करने लगा कि आज रात का खाना हम दोनों उनके साथ चलकर उनके घर खाएं.

मेरे काफी मना करने के बाद भी वह लोग नहीं माने. आखिर हमें उनकी जिद के आगे झुकना पड़ा. फिर हम दोस्त के घर की ओर निकल पड़े. उनके साथ घर जाकर काफी देर तक उनके साथ समय बिताया. फिर हमने साथ खाना खाया.

खाना खाने के दौरान मित्र ने मुझसे शादी के बारे में पूछा.

इस पर सीमा ने फर्जी शादी को लेकर काफी मस्त किस्से सुनाए. मुझे सुन सुन कर हंसी आ रही थी. अच्छा भी लग रहा था. मैं सोच रहा था कि काश यह सच होता.


खाना खाने के बाद मैं और सीमा वहां से रवाना हो गए. इस बार कार मैं सीमा से पूछा- और कहां चलना है मैडम?
इस पर सीमा ने कहा- एक लॉन्ग ड्राइव पर.

इस बार गाड़ी हाईवे की ओर मोड़ दी. हाईवे पर चलते चलते करीबन 15 किलोमीटर आगे चले गए थे. उसके बाद हम लोग अब भी नॉर्मल तरीके से बात कर रहे थे.

अचानक मैंने सीमा से पूछा- आज की शाम आपको कैसी लग रही है?
लेकिन इस पर सीमा का कोई जवाब नहीं दिया. वह शर्मा रही थी. मैं बार बार सीमा को देख रहा था.

इस पर सीमा की भी नज़र थी. बात करते करते मैंने सीमा के हाथों पर हाथ रख दिया. इस पर सीमा एकदम शान्त हो गई. मैंने भी कार रोड के किनारे लगाकर खड़ी कर दी. कार रुकते ही सीमा कार से निकल कर बाहर खड़ी हो गई. मैं भी 5 मिनट रुक कर सोचता रहा कि गलती कर दी. मैं अपने आपको कोसने लगा.

कुछ समय बाद मैं कार से उतरा और सीमा के पास आकर उससे सॉरी बोलने की सोचने लगा.

लेकिन ये क्या मैं सीमा के पास जैसे ही पहुंचा, उसने मुझे पकड़ कर चूमना शुरू कर दिया. मैं भी सब कुछ भूलकर हाई-वे पर ही सीमा के चुम्बन का जवाब देने लगा. कुछ समय बाद तो मैं सीमा को बुरी तरह चूम रहा था. मैं सब भूल चुका था. किस करते करते मैंने सीमा के होंठों को काट भी लिया. सीमा को दर्द भी हो रहा था, पर मज़ा भी आ रहा था शायद इसलिए वो मेरा साथ दे रही थी. हम दोनों की जुबानें एक दूसरे से लिपट गई थीं. मानो कभी अलग ना होने वाली हों.

करीब 10 मिनट बाद सीमा ने मुझे धक्का देकर दूर किया और कार का दरवाजा खोलकर बैठ गई. मैं भी कुछ समय बाहर रहकर कार में आया.

कार चालू करके सीधा सीमा को घर छोड़ने निकल पड़ा. रास्ते भर हमने कोई बात नहीं. फिर सीमा के घर पर कार रूकी, सीमा उतर कर चली गई. मैंने भी कार मोड़ दी और अपने घर पर चल दिया. मैंने टाईम देखा तो 11 बज चुके थे.

मैं रात 12:40 पर घर पहुंचा, फ्रेश होकर बेड पर लेट कर सीमा के साथ बिताए हुए समय के बारे में सोच रहा था. स्पेशली वो समूच किस के बारे में, जिसमें हम दोनों एक दूसरे में समा गए थे. किस के दौरान मेरा हाथ सिर्फ उसके चेहरे को पकड़े हुआ था और मैंने उसे कहीं नहीं छुआ था. लेकिन उस किस ने मुझे अन्दर से हल्ला दिया. ऐसे सोचते करते टाईम कब बीत गया, पता ही नहीं चला और यह सोचकर कि अब सीमा मुझसे कभी बात भी नहीं करेगी. यही सोचते सोचते कब आंख लग गई, पता ही नहीं चला और मैं गहरी नींद में सो गया.

अगली सुबह राइट 8 बजे मेरे फोन की घटी बजी. मैंने भी अचानक जागते हुए बिना देखे फोन उठा लिया.
उधर से आवाज आई- गुड मॉर्निंग …

यह सीमा की आवाज थी. सुनकर मैं कुछ बोल ही नहीं पाया.
इस पर सीमा ने फिर से विश किया- गुड मॉर्निंग.
इस पर मैंने भी रिप्लाई में गुड मॉर्निंग कहा.

सीमा ने कहा- आपकी चाय तैयार है अगर सोकर उठ गए हो जनाब, तो आ जाएं.
उसकी इस तरह की बोली पर मैं भी खुश हो गया और मैंने जल्दी ही आने को बोला- ओके अभी आता हूँ.

मैं जल्दी से फ्रेश होकर तैयार हुआ और मंजिल की ओर निकल पड़ा. रास्ते में मैंने फूलों का गुलदस्ता ले लिया और सोचा कि आज दिन सही है. आज सीमा को प्रोपोज कर दूंगा.

यह सोचते हुए मैं उसके घर आ पहुंचा. मेरे डोरबेल बजाने पर सीमा ने दरवाजा खोला. मैंने देखा, तो सीमा अलग सी नज़र आ रही थी. उसने ब्लू कलर का 2 पीस गाउन पहना हुआ था और अपना सर भी नहीं ढका था. उसके बाल भी खुले थे, जो कि उसकी कमर तक आ रहे थे.

वो सामने खड़ी मुस्कुरा रही थी. सीमा बोली- अब देखते ही रहेंगे या अन्दर भी आएंगे.

मैं अन्दर आ गया और सोफे पर बैठ गया. सीमा भी किचन की ओर जाने लगी. मैं बस उसकी नागिन सी चाल को देख रहा था.

कुछ देर बाद सीमा चाय के 2 कप ट्रे में लेकर आई. मैं और वो दोनों सोफे पर आमने सामने बैठे थे. हमने चाय पीते पीते बात करना शुरू की.

मैंने कहा- इतनी सुबह जल्दी चाय के लिए बुला लिया.
इस पर सीमा बोली- क्यों हमारा इतना भी हक़ नहीं कि हम आपको बुला सकें.

वो अंगड़ाई लेते हुए मुझसे बात कर रही थी. मैंने सोचा कि समय सही है, प्रोपोज कर देता हूँ.

मैंने फूलों का गुलदस्ता निकाला, जो मैं एक बैग में रखकर लाया था. मैंने उसे सीमा को देते हुए कहा- आई लाइक यू सीमा!
उसने हंसते हुए फूलों के गुलदस्ते को लिया और कहा- मी टू. … मगर सब झूठ, अगर इतना ही लाइक करते, तो आज तक प्रोपोज क्यों नहीं किया.
मैं कुछ नहीं बोला.

वो बोली- मेरे बुद्धू बालम … ये बात बोलने में तुमने पूरे 6 महीने लगा दिए. मैंने तो शादी की पार्टी के दिन से ही तुम्हारी नज़र को पढ़ लिया था, जब तुम बार बार मेरे आगे पीछे घूम रहे थे. इसलिए तो मैं भी बार बार तुम्हें ही देख रही थी, बाद में जब भी तुम आते, तो तुम्हारे सामने से जानबूझ कर बार बार आती जाती … और हां तुम्हारा फोन भी मैं ही पिक करती. मैं सोचती कि तुम कभी तो इशारा समझोगे, पर तुम बुद्धू बॉलम, मेरी नजर को कभी नहीं समझे.

यह सुनकर मेरा तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा. मैं उठकर सीमा की तरफ बढ़ा, तो सीमा भी उठकर सोफे की आड़ लेकर भागी.
वो बोली- न न … अभी नहीं.

मैं रुक गया और अपनी जगह पर बैठ गया. सीमा भी अपनी जगह पर बैठ गई.
वो मुझसे बोली- अपनी दुल्हन से सुहागरात की सेज पर ही मिलना … दुल्हन की मुँह दिखाई भी लूंगी.
मैं बोला- ज़रूर … पर कैसे?
सीमा बोली- नेपाल से बाहर कहीं रिसार्ट में 3 दिनों के लिए एक रूम बुक कर लो.
मैं- ठीक है … लेकिन मेरी भी एक शर्त है. मुझे तुम वैसी ही दुल्हन के जोड़े में सजी हुई चाहिए, जब मैंने पहले बार तुम्हें देखा था. स्टेज पर सजी संवरी लहंगा चुनरी में.
वो बोली- ठीक है … मैं वैसी ही मिलूंगी.
मैं बोला- लेकिन तुम आओगी कैसे … वो भी 3 दिनों के लिए?
वो बोली- तुम बस देखते जाओ.

सीमा ने सोहन को फोन लगाया और स्पीकर ऑन किया.
सोहन- हां जान बोलो.
सीमा- हैलो … वो मेरी सहेली सुचिता के भाई की सगाई पक्की हो गई है और वो मुझे भी उसके साथ 3 दिन के लिए इंदौर के पास में चलने को बोल रही है. आप भी यहां नहीं हो, तो मैं सोच रही थी कि चली जाती, घूमना भी हो जाता.
सोहन- ठीक है … मैं संजय को बोल देता हूँ कि तुम जा रही हो.
सीमा- ओके थैंक्यू एंड लव यू.
सोहन- कब निकलना है?
सीमा- आज दोपहर 4 बजे.
सोहन- ओके बाई … मैं थोड़ा बिज़ी रहूँगा, तो फोन नहीं कर पाऊंगा.
सीमा- ओके ठीक है … कोई बात नहीं, मैं भी थोड़ा पार्टी में रहूंगी, तो फोन नहीं हो पाएगा … बाई.

सीमा ने मुझे आंख मारते हुए फोन काट दिया. फिर सीमा ने अपनी सहेली सुचिता को फोन लगाकर उससे भी बात कर ली.

सीमा मुझे एक बड़ी ही बिंदास लड़की लगी. उसकी हिम्मत देख कर मैं दंग रह गया.

अब आगे उसके साथ क्या हुआ, वो मैं आपको अगले भाग में लिखूंगा. मेरी ये सेक्स कहानी आपको कैसी लगी, प्लीज़ मुझे मेल करें.
भाई सोहन की बीवी के साथ सुहागरात 2019 भाई सोहन की बीवी के साथ सुहागरात 2019 Reviewed by Robert on January 05, 2020 Rating: 5

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