मामी भांजी और जोधपुर कि गर्मी

मेरा नाम मोना है, मेरी उमर 26 है
ये कहानी मै और मेरे बेटे कि. जिसका नाम दीपक है.
वो हमेशा घर पे हि था, किसी काम के लिये उसे जोधपुर जाना था. हमारे पास अच्छा पैसा है इसलिये हम ने सोचा ऐसे वहा एक रेंट पे छोटा फ्लॅट ले. 2 साल कि हि तो बात है. ता के वो अपनी पढाई अच्छी कर सके. तो हम वहा चाले गये. मै ने उसे बोला तुझे मिलने आया कारुंगी, तेरा खाने पिने का सामान भरुंगी. और एक लाडका भी है जो तेरे लिये बाकी दिन घर मे हि खाना बना के रखे गा. और मै तेरे लिये बनावुगी
उसने काह ठीक है!
असलं मे मै नही चाहती के वो मुझसे जादा दूर रहे, और मैने जाना चालू किया, वैसे भी इसके मामा बिसनेस मे बीजी रहते है तो उन्स से मुझे परमिशन मिली जाने के लिये
वहा तो बहुत हि गर्मी है हमने छोटा कूलर बी लिया था उसका कोई इतना फायदा नही होता था.
मै जब वहा जाती तो फ्री हि रहती. घरमे पेटी और ब्लाउज मे ही रहती थी जब अकेली रहती, कभी कभी गाऊन के अंदर कुछ नही पेहनती.
उसे भी मेरा आना जाना अच्छा लगने लगा. हम घुमने भी जाते, शॉपिंग भी करते, मूवी भी देख ते..मै जब घर होती थी तो वो कही नही जाता मेरे हि पास रहात.
अब हम मे फ़्रिएन्दशिप हो गाई के मै उसके सामने भी साडी बदलती थी.
दीपक कि उमर करीब 21वर्ष है. मै 36D का ब्रा पेहत्तीं हू. दीपक मेरे से थोडा उंचा है मै जब घर खाना बन्ना ती हू तो वो किसी ना किसी बहाने से किचन मे आता था..और मुझे टच करने कि कोशिश कर ता था. हमारा किचन छोटा था…वो खाली थोडा बडा था



मैने कहा दीपक बेटे यहा कितनी गर्मी है, सोचा नहा लू”
बाहर हि था दीपक, फ्लॅट छोटा था , 1 रूम और 1 किचन, एक हि साल के लिये था. बेड नही था
दीपक ठीक है मामी नहालो आप
और मै बाथरूम चली गई. करीब 3:30 बाजे, नहाते समय मैने सोचा वैसे भी मै दीपक के सामने कपडे बदल ती हू तो क्यो नाही आज टॉवेल पे हि रहू..” हाय रे ये जोधपुर कि गर्मी”
मेने दो टॉवेल लिये, शॉवर के बाद एक टॉवेल से बदन पुच्छा और बाल थोडे गिले हि थे, मैने दुसरा ट्रान्सपरंट टॉवेल मेरे बदन को लपेटा और बाहर आ गयी.. अब मै दीपक के सामने ने हि थी.. बाल पोच रही थी, और दीपक मेरी तरफ वासना कि नजर से देख राहा था. मेरे उरोज अब ऊस टॉवेल के वाजहसे दिख रहे थे ये मैने जान लिया.. तंबीही दीपक गद्दी से उठा और मेरे तरफ आने लगा मुझे कस के पकडा.

दीपक ने मुझे ऐसे पकडा कि, मेरे मु मे आपना मु डाल के किस किया……
मै ” छोडो मुझे”
दीपक नही  थोडी देर”
मै ऐसा नही करते भांजी, भांजी छोडो मुझे मै ‘तेरी मामी हू”
दीपक नही नही छोडूगा, थोडी देर…
उसी वक्त मेरा टॉवेल नीचे गिरा, और दीपक ने अपनी शॉर्ट और अंडरवेअर कब निकाली वो पता हि नही चला. अब मुझे भी थोडा मझा आ रहा था. मै भी कब उसके आहोष मी आ गयी वो भी नही समझा.,उसने लंड मेरे बुर मी घूसा.

और मेरे चुचीयो दाबाने लगा. मेरी चुचीयो के साथ खेल ने लगा, उनको चुसने लागा काटने लगा,
मै” नही बेटे, इतना झोर से मत काटो, नही तो मेरे चुचीयो पे निशान लग जायेंगे”
दीपक क्या मस्त बूब्स है तेरे, मोटे मोटे…
मै ” ओह्ह नही”
अब वो मुझे खडे खडे हि चोद ने लगा
अपना लंबा मोटा लंड मेरे बुर मे पेल दिया
अब मेरा टॉवेल गीर गया था..वो मुझे खडे खडे हि चोद रहा था..

दीपक चलो बाथरूम मे”
और आपना लंड मेरे बुर से बिना निकाले बाथरूम मे ले गया..
और नीचे से जोर से आपना लंड हिला हिला के चोद ने लागा, शॉवर भी चालू किया,
दोनो भी नंगे थे.
मुझे बहुत हि दर्द हो राहा था लेकीने माझा भी आ राहा था…
मैने दोनो हाथ उपर लिये और शॉवर का रॉड पकडा..
वो नीचे से फटके दे रहा था… तंबीही उसका ध्यान बाथरूम के छोटे स्टूल पे गया..
उसने बाथरूम का स्टूल लिया मेरा एक पैर स्टूल पे रखा.. और फिर से चालू हो गया ….
अब.. उसने जोर से पकडा और रुक गया… और मे भी थंडी हो गाई…
उसका पाणी मेरे बुर मे घुसने चालू हो गया..
पुरे पानी से मेरी बुर भर गेऐ
हम दोनो काफी समय वैसे हि थे..फिर अलग हो गये.
शाम को 4 बजे दीपक ने कहा चलो बाहर घूम ने जाते है..
हम चले गये. खाना खाया और देर रात करीब11:30 बजे तक घर आये इस दौरान हम ने 14 बात चीत नाही हुई.
हम घर आ गये, गरम हो राहा था मै बाथरूम मे गयी और शॉवर ले लिया..
मेरे नहाने के बाद दीपक भी शॉवर ले ने गया..
मै बाहर के रूम मे आके गड्डी पे सो गयी, किचन का लाईट ऑन था, दीपक भी नाहाके आया वो टॉवेल पे था. सब लिट ऑफ थे खाली किचन का, उस ने मुझे देखा.....
मैने भी उसे देखा.....
उसका ध्यान बाजू मे गया और वो समझ गया. मै ने मेरा टॉवेल बाजू मे रखा था..
और मैने मेरे उपर चद्दर थी. वो समझ गया की मै चद्दर मे नंगी हू.
उसने मेरे सामने हि उसका टॉवेल निकाला और पुरा नंगा खडा हो गया, उसका मोटा लंबा लंड मेरे सामने झूल रहा था..
किचन का लाईट ऑफ किया और मेरे चद्दर मे आ गया.
अब रूम मे अंधेरा हो गया.
मालूम नही.. उसने मेरे बारे मे आपनी उंगली डालना चालू किया…
अंधेरा था कुछ दिखाई नही दे रहा था.
थोडी देर बाद उसने मुझे उलटा सुलाया.. अब मेरे गांड उसकी तरफ थी.
उसने मेरे पेट के नीचे टकिया रखा. मैने सोचा शायद उसे मुझे पिछेसे चोद ना है.
तभी मेरे गांड के होल पे.. वो थुका.. और अपनी उंगली डाल के मेरी गांड चिप चिपा कर दि.
अपने लंड का सुपारा मेरे गांड पे रखा और जोर का झटका दिया… अपना लंड मेरे गांड मे एक हि होल मे आधा घुसड दिया. ..



और मुझे गन्धु जैसे चोद ना चालू किया..
एक हाथ मेरे चुत मे घुसेडा एक तरफ मेरे मु मे आपण मुह् मे डाल दिया..
और अपना लंड से मेरी गांड मार रहा था…
मै चिला भी नही सक्ती…
40 मिनट तक वो मेरी गांड मार रहा था…
वो 40 मिनट मरे लिये खतरनाक और मजे के भी थे..
उसने पानी पुरा मेरे गांड मे छोड दिया…
रात को उसने मेरी 56 बार गांड मारी, और सुभे मै उठी तो मेरी हालत खराब हि थी ....
उसने पहले भी मेरे को चोद दिया घर पे.
अब मै जब भी जाती सब से पेहेले मेरी गांड हि चूदवाती
मामी भांजी और जोधपुर कि गर्मी मामी भांजी और जोधपुर कि गर्मी Reviewed by Robert on March 19, 2020 Rating: 5

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