भाभी को होली के दिन चुदा


नमस्कार दोस्तो,

यह कहानी ।

मेरी और एक औरत है। मैं एक मास्टर हूं। आप सबको तो पता होगा कि ये एक्जाम अपने शहर से दूर होते हैं। इसलिए काफी दूर तक भी जाना पड़ जाता है।

पिछले दिनों मे मेरा एक पेपर पंजाब से कुछ दूर था मेरे दोस्तों का भी था.

तो मैं अपने दोस्तों के साथ सुबह ही घर से तैयार होकर ट्रेन से निकल लिया.

जुलाई का महीना था इसलिये गर्मी ज्यादा थी। इसलिए मैं टी-शर्ट और जीन्स ही पहन कर निकला था. हम लोग 12:30 बजे पंजाब पहुँच गए पेपर का टाइम 3:30 बजे था ।

जब ट्रेन की तरफ गया तो देखा उसमें बहुत ही ज्यादा भीड़ थी सारी सीट बुक हो चुकी थीं और बहुत से लोग खड़े भी थे।



पेपर के लिए लेट हो रहा था
इसलिए मैं न चाहते हुए भी उस ट्रेन में चढ़ गया। जब ट्रेन में चढ़ा तो खड़े लोगो से ट्रेन भरी हुई थी.
मेरे चढ़ते ही ट्रेन चलने लगी.
और लड़के जो शायद पेपर ही देने जा रहे थे मेरे पीछे आकर खड़े हो गए जिसकी वजह से मुझे ट्रेन में आगे की तरफ बढ़ना पड़ा।

जब मैं आगे की तरफ बढ़ा तो मेरी नज़रें अचानक से रुक गयीं, मैंने देखा कि कोई भाभी खड़ी थी. लेकिन मैं सिर्फ अभी उनको पीछे की तरफ से ही देख पाया था लेकिन पीछे से देख कर ही मुझे अंदाजा हो गया कि ये औरत अच्छों के लंड खड़े कर सकती है।
उठी हुई गाण्ड … उफ्फ!

खैर मैं अभी उस रानी से थोड़ी सी दूरी पर ही था लेकिन उसके शरीर मुझे अपनी और आकर्षित कर रही थी।

तभी एक स्टॉप पर ट्रेन रुकी और कुछ भीड़ और ज्यादा बढ़ गयी जिस कारण मुझे थोड़ा धक्का सा लगा और मेरा और उस रानी का एक हल्का सा स्पर्श हो गया जिसकी वजह से उसने मुझे मुड़ कर देखा और हल्के से आँखें दिखाई।

लेकिन मैंने कहा कि धक्का लगा है. तो उसने हल्की सी स्माइल दी और फिर आगे की तरफ अपना चेहरा कर लिया।
लेकिन उसका चेहरा देख कर अंदाजा हो गया कि आंटी की उम्र 30 के आस पास होगी.

वो बिल्कुल एक नयी नवेली रानी की तरह लग रही थी।

वो आँखें, दूध सा गोरा चेहरा, टमाटर जैसे गाल, मोटी-मोटी और पतले पतले सुर्ख लाल रंगे हुए होंठ और बहुत कड़क से लग रहे थे. उसके लगभग 40 के चूचे, उठी हुई गाण्ड, मैं तो देखकर ही मदहोश सा हो गया।
काश इस औरत को चखने का मौका मिल जाए तो जिंदगी सफल हो जाए।



खैर भीड़ की वजह से अब मैं उस आंटी से बिल्कुल चिपक कर ही खड़ा था. जैसे ट्रेन में ब्रेक लगती तो मैं आंटी की गाण्ड से हल्का सा छू जाता.
उफ्फ … क्या मस्त गान्ड थी यार!

लेकिन अब मेरी हिम्मत बढ़ती जा रही थी और मुझे पता भी नहीं चला कब मेरे हाथ मेरे काबू से बाहर होने लगे थे।

मेरे हाथों पर से ही मेरा कंट्रोल ख़त्म होता जा रहा था और मेरा हाथ उस के ऊपर से ही उसके चूतड़ों को सहलाना चाह रहे थे. फिर एकदम से मैंने हाथ उसकी जाँघ पे रख दिया.

मैं डर-डर के अंदर जाने लगा तो वो बोली डरो मत यहां कोई भी नहीं है.

वो बोली- जाओ फ्रेश हो लो, तुम पसीने में हो.
मैंने बताया मेरे पास कपड़े नहीं हैं,



भाभी को होली के दिन चुदा भाभी को होली के दिन चुदा Reviewed by Robert on February 07, 2020 Rating: 5

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