काका की नजर भतीजी की कुंवारी चुत पर

दोस्तो,
आप सबकी अजय सिंह एक कहानी के साथ फिर से आप के सामने आई है।

अभी तक हिंदी कहानी साईट पर प्रकाशित मेरी कहानियों को आप ने काफी पसंद किया,



तो दोस्तो, चलते हैं काका भतीजी की चुदाई कहानी की तरफ।

पंजाब की रहने वाली 21 वर्ष की  है। वह 10 वीं क्लास की छात्रा है और एक खूबसूरत जिस्म की है।

गीता के घर में गीता के अलावा उसके पिता माता और दो बहन थी जिसकी शादी हो चुकी है। गीता के पिता एक मास्टर थे ।
उनका परिवार सामान्य ही है और गीता भी एक सामान्य सी लड़की थी।

जवानी में अच्छे-अच्छे कदम रखने के बाद गीता के मन में उथल पुथल रहती थी बहन के द्वारा सेक्स के बारे में बातें होती थी पर ऐसा मौका उसे नहीं मिला था।

उसके काका काफी रंगीन आदमी थे और जब से गीता कुछ बड़ी हुई थी वो अक्सर उसे छेड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे।

जब भी वो गीता के यहाँ आया करते तो गीता के साथ ही ज्यादा बिताते समय क्योंकि उनके घर पर गीता के पिता के अलावा दूसरा कोई नही था।
इसलिए गीता के साथ ही मजाक चलता रहता था।

उसकी लंबाई 5.9 फीट, शरीर काफी गदराया हुआ,रंग गोरा । और उसका फिगर 38 48 58 था।
कि उसके चूतड़ काफी बड़े थे। खासकर उसकी गांड को देखने से ही लंड खड़े हो जाते थे।




मैं अभी 10वीं की परीक्षा की तैयारियों में थी। मेरा काम सुबह स्कूल जाना और दोपहर 3:30 बजे वापस आकर घर का काम करना और शाम को 6:45 बजे ट्यूशन जाना।
मैंने कभी भी सेक्स नहीं किया था मगर अपनी बहन के साथ फ़ोन पर कई बार सेक्स फ़िल्म देखा करती हूं।

मेरी बहन के बॉयफ्रेंड थे और उसने चुत चुदाई का अनुभव ले लिया था।

मेरे मन में हमेशा गंदी बात घूमा करती थी। और रात में अकेली सोती थी तो चुदाई की बात सोच कर मेरी चड्डी गीली करती थी।

मैं हमेशा ही जींस और सुट पहना करती हूं। और ड्रेस में स्कूल के लिए निकलती तो लोगों की निगाह मेरे ऊपर होती थी।

कुछ लोग मुझे सुना कर कई बातें कहते ।

और जहाँ मैं ट्यूशन जाती थी वही एक आदमी हमेशा मुझे ताड़ते रहते थे।

मेरे मन में और भी ज्यादा उथल-पुथल रहती थी। सच तो मेरा भी मन चुदाई के लिए था।
मगर घर का डर हमेशा रोकता था।

पिछली दिवाली में मेरे साथ एक ऐसी घटना हुई जो शायद भूल नहीं सकती।

मेरे काका जी दिवाली मनाने के लिए हमारे घर आए हुए थे। बहन तो माँ के साथ ही व्यस्त रहती थी और काका हमेशा मेरे साथ ही मजाक किया करते थे।

उनके प्रति मेरे मन में ऐसा कुछ गलत कभी नहीं आया क्योंकि वो मेरे काका थे औऱ मुझसे उम्र में भी बड़े थे। उनकी उम्र 36 साल की थी और मैं 21की।

दिवाली की सुबह ही हम लोगों ने नहा कर भगवान की पूजा की और करीब 10:30 बजे मैं अपनी बहन के साथ दिवाली खेल रही थी।
उस वक्त काका हम दोनों को देख रहे थे।

उस बाद बहन नहाने चली गई और मैं घर के आंगन में बैठी हुई धूप ले रही थी।
पापा भी बाहर निकल गए थे और माँ गई हुई थी।

मैं अकेली ही बैठी हुई थी पीछे से काका ने मुझे पकड़ लिया। उनके दोनों हाथों में रंग था।
उन्होंने जकड़ लिया और बोले- आज मेरी बीवी को तुमने रंग लगाया है,तुम्हारी बारी है, अब तुम तैयार हो जाओ भतीजी |

इतना बोलते हुए काका मेरे गालों पर रंग लगाने लगे.

और मेरे बड़े बड़े दूध मेरी कुर्ती से बाहर आ रहे थे।
गालों पर रंग लगाते हुए वो मेरे गले पर रंग लगाने लगे। मैं चुपचाप बैठी उनसे प्रेम से लगवा रही थी।

उन्होंने जेब से रंग निकाला और हाथों में लेकर मलने लगे।
मैं बोली-काका, अब औऱ कितना लगाओगे बस करो।
तो वो बोले- तू भतीजी है मेरी … मतलब घर वाली है. तुझे तो रंग लगाना है।
मैं हँसती हुई बोली- क्या मतलब?

मेरा इतना बोलना हुआ |
उन्होंने अपने हाथ गले के पास से कुर्ती के अंदर डाल कर मेरे दोनों को जकड़ लिया।

मैं मचलती रही वो मेरे दूध में रंग लगाते रहे।
मैं उनसे छुटने की कोशिश कर रहे।
रंग के बहाने वो मेरे दूध को जोर जोर से मसल रहे थे।

किसी ने मेरे दूध को छुआ था। बहुत मचल रही थी।

किसी तरह से मैं उठी तो उन्होंने मुझे पीछे से जकड़ लिया। काका का मोटा सा लंड मेरी गांड में चिपक गया। मुझे बहुत अजीब लगा.



हाथ निकाल कर एक हाथ से मेरे दोनों हाथों को जकड़ लिया।
उसके बाद काका अपना एक हाथ मेरी चड्डी में डाल कर मेरे चूतड़ों पर लगाने लगे।

मुझे शर्म आ रही थी मैं छूटने की कोशिश करती रही।
काका ने मेरे चूतड़ पर रंग लगाया फिर मेरी चुत तक हाथ डाल दिया।

अब मुझे अजीब सा लगा मैंने पूरी ताकत से उनको धक्का दिया और उनसे अलग हो गई।
मैंने जल्दी से अपने कपड़े ठीक किये.
काका बस मुझे देखकर मुस्कुरा रहे थे।


मेरी साँसें तेज़ी से चल रही थी काका की वो हरकत सोच कर दिल में हलचल मची हुई थी। मैंने अपने सारे कपड़े उतार फेंके. मेरे दूध एकदम से तने हुए थे उन पर रंग लगा हुआ था। मेरे पेट, चूतड़ और थोड़ा रंग चुत में भी लगा हुआ था।






काका की नजर भतीजी की कुंवारी चुत पर काका की नजर भतीजी की कुंवारी चुत पर Reviewed by Robert on February 07, 2020 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.